bihar board 10th science subjective important question

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bihar board 10th science subjective | 10th science subjective question bihar board exam 2022

 

 

अवतल दर्पण(concave mirror) के सामने अलग – अलग जगह पर रखी वस्तु का प्रतिबिंब

 

 

1. जब वस्तु अवतल दर्पण के फोकस और ध्रुव के बीच स्थित है-
जब वस्तु (बिंब) AB अवतल दर्पण के फोकस F और ध्रुव P के बीच रहती है तब प्रतिबिंब AB’ दर्पण के पीछे की ओर बनता है (चित्र 1.18)। यह प्रतिबिंब काल्पनिक (virtual), सीधा (erect) और आवर्धित अर्थात वस्तु से बड़ा (magnified) होता है।

2. जव वस्तु अवतल दर्पण के फोकस पर स्थित है-
जब वस्तु (बिंब) AB अवतल दर्पण के फोकस F पर रहती है तब प्रतिबिंब अनंत (infinity) पर बनता है (चित्र 1.19)। यह प्रतिबिंब वास्तविक, उलटा और बहुत ही आवर्धित अर्थात वस्तु से बहुत ही बड़ा होता है।

3. जव वस्तु अवतल दर्पण के वक्रता-
केंद्र और फोकस के वीच स्थित है-जब वस्तु (बिंब) AB अवतल दर्पण के वक्रता-केंद्र C और फोकस F के बीच रहती है तब प्रतिबिंब AB वक्रता-केंद्र और अनंत के बीच (अर्थात, वक्रता-केंद्र के परे) बनता है

4. जव वस्तु अवतल दर्पण के वक्रता-
केंद्र पर स्थित है-जब वस्तु (बिंब) AB अवतल दर्पण के वक्रता-केंद्र C पर रहती है तब प्रतिबिंब AB’ वक्रता-केंद्र पर ही बनता है। यह प्रतिबिंब वास्तविक, उलटा और वस्तु के आकार (साइज) के बराबर होता है (चित्र 1.21)।

5. जव वस्तु अनंत और अवतल दर्पण के वक्रता-केंद्र के वीच स्थित है-
जब वस्तु (बिंब) AB अनंत और अवतल दर्पण के वक्रता-केंद्र C के बीच (अर्थात, वक्रता-केंद्र से परे) रहती है तब प्रतिबिंब A’B’ दर्पण के वक्रता-केंद्र C और फोकस F के बीच बनता है (चित्र 1.22)। यह प्रतिबिंब वास्तविक, उलटा और वस्तु से छोटा (diminished) होता है।

6. जव वस्तु अनंत पर स्थित है-
चंद्रमा, सूर्य आदि जैसी वस्तुएँ दर्पण के सामने होने पर उन्हें अनंत दूरी (infinite distance) पर स्थित माना जाता है। ऐसी वस्तुओं से आनेवाली किरणें समांतर होती हैं। जब समांतर किरणें अवतल दर्पण पर आपतित होती हैं (चित्र 1.23), तो वे दर्पण से परावर्तित होकर फोकस-तल (focal plane) पर एक बिंदु पर मिलती हैं। इसलिए, अनंत पर स्थित वस्तु का प्रतिबिंब A’B’ वास्तविक, उलटा तथा वस्तु से बहुत ही छोटा होता है।

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अवतल दर्पण के उपयोग अवतल दर्पण के मुख्य उपयोग निम्नलिखित हैं।
1. चूँकि अवतल दर्पण निकट रखी वस्तु का सीधा, बड़ा तथा आभासी प्रतिबिंब बनाता है, इसलिए बड़ी वक्रता-त्रिज्या(Radius of curvature ) वाले अवतल दर्पण (concave mirror )का उपयोग हजामती (दाढ़ी बनाने के लिए) दर्पण के रूप में किया जाता है (चित्र 1.25)।

2. टॉर्च, वाहनों के हेडलाइटों तथा सर्चलाइटों में अवतल दर्पण का उपयोग परावर्तकों के रूप में किया जाता है। इनमें प्रकाश के स्रोत (बल्ब) को अवतल दर्पण के फोकस पर रखा जाता है, जिससे परावर्तन(reflection ) के बाद प्रकाश का समांतर किरणपुंज(parallel beam) मिलता है।

3. रोगियों के नाक, कान, गले, दाँत आदि की जाँच के लिए डॉक्टर अवतल दर्पण का उपयोग करते हैं, जो किसी प्रकाश-स्रोत (जैसे—बिजली के बल्ब) से आते प्रकाश को एक छोटी-सी जगह में केंद्रित कर देता है (चित्र 1.26)।

4. सौर भट्ठियों (solar furmaces) में सूर्य से आती ऊष्मा-ऊर्जा (thermal radiation) को बड़े-बड़े अवतल दर्पणों द्वारा छोटी जगह पर केंद्रित किया जाता है और इससे प्राप्त ऊष्मा (heat) से कई प्रकार के उपयोग लिए जाते हैं।

उत्तल दर्पण के उपयोग स्कूटर, मोटरकार तथा बस इत्यादि में उत्तल दर्पण का उपयोग साइड मिरर (side mirror) और पीछे देखने के आइने

(rear-view mirror) के रूप में होता है, क्योंकि वे किसी वस्त का हमेशा सीधा प्रतिबिंब बनाते हैं, यद्यपि वह छोटा होता है। इनका दृष्टि-क्षेत्र (field of vision) विस्तृत होता है

इस चिह्न परिपाटी के अनुसार,
अवतल दर्पण की वक्रता-त्रिज्या (R) तथा फोकस-दूरी (f) ऋणात्मक होती हैं।
उत्तल दर्पण की वक्रता-त्रिज्या (R) तथा फोकस-दूरी (f) धनात्मक होती हैं।

दर्पण सूत्र
किसी गोलीय दर्पण (spherical mirror) के लिए (चित्र 1.30)
(i) ध्रुव P से वस्तु 0 की दूरी (PO) को वस्तु-दूरी या विव-दूरी (object distance) कहा जाता है और इसे संकेत ॥ से निरूपित किया जाता है।
(ii) ध्रुव P से प्रतिबिंब I की दूरी (PI) को प्रतिविंव-दूरी (image distance) कहते हैं और इसे संकेत । से निरूपित करते हैं।

ध्रुव P से दर्पण के फोकस F की दूरी (PF) को फोकस-दूरी (focal length) कहा जाता है और इसका संकेत f है।
(iv) ध्रुव P से दर्पण के वक्रता-केंद्र C की दूरी (PC) को वक्रता-त्रिज्या (radius of curvature) कहते हैं और इसे R से निरूपित करते हैं।
गोलीय दर्पण के लिए वस्तु-दरी u प्रतिबिंब-दुरी v और फोकस-दूरी f के बीच के संबंध को एक सूत्र से बताया जा सकता है जिसे दर्पणसूत्र (mirror formula) कहा जाता है।

1/u+1/v= 1/f

 

फिर, हम जानते हैं कि f=R/2

1/u+1/v= 2/R

 

 

 

आवर्धन –
प्रतिबिंव की ऊँचाई और वस्तु की ऊँचाई के अनुपात को आवर्धन (magnification) कहा जाता है। आवर्धन को m से सूचित किया जाता है।

m =h’/h

नोट – जहाँ h’ प्रतिबिंब की ऊँचाई है  और  h वस्तु की ऊँचाई है

यदि आवर्धन ऋणात्मक हो इसका मतलब यह होता है की प्रतिबिंब वास्तविक बनेगा

और यदि आवर्धन धनात्मक हो इसका मतलब यह होता है की प्रतिबिंब आभासी बनेगा

 

m =-V/U

नोट – जहाँ   v प्रतिबिंब की दुरी और u वस्तु दुरी है

यदि आवर्धन ऋणात्मक हो इसका मतलब यह होता है की प्रतिबिंब वस्तु के सापेक्ष उल्टा बनेगा

और यदि आवर्धन धनात्मक हो इसका मतलब यह होता है की प्रतिबिंब वस्तु के सापेक्ष सीधा बनेगा

 

 

चूँकि, प्रायः वस्तु को दर्पण के मुख्य अक्ष के ऊपर की ओर रखा जाता है, इसलिए वस्तु की ऊँचाई को धनात्मक लिया जाता है| अतः, आभासी प्रतिबिम्ब की ऊँचाई को ऋणात्मक लेना होगा|

 

आवर्धन m के मान में ऋणात्मक चिंह का अर्थ है कि प्रतिबिम्ब वस्तु के सापेक्ष उल्टा बनता है, अर्थात प्रतिबिम्ब वास्तविक (real) है, और m का धनात्मक मान आभासी प्रतिबिंब इंगित करता है|

 

प्रश्न – एक गोलिय दर्पण की वकता त्रिज्या 25 सेमी है तो गोलीय दर्पण की फोकस दुरी क्या होगा ,

 

उत्तर – हम जानते है की फोकस दुरी वकता त्रिज्या की आधी होती होती है अतः

F= R/2

यानी  F= 25/2

= 12.50 सेमी

 

यदि गोलीय दर्पण के त्रिज्या 25 सेमी है तो गोलीय दर्पण की फोकस दुरी  12.50 सेमी  होगा

 

 

class 10th bharti bhawan अम्ल भस्म लवण  का पार्ट -1 देखने के लिए यहा क्लिक करे-

 

 

 

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