Matric Question Paper 2022 विज्ञान अम्ल भस्म लवण SUBJECTIVE QUESTION

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Matric Question Paper 2022 विज्ञान अम्ल भस्म लवण SUBJECTIVE QUESTION

acid base salt in hindi

अम्ल एवं भस्म (Acid and Base)

 गुणों के आधार पर ही   अम्ल तथा भस्म की परिभाषित  किया जाता है। 

अम्ल वह पदार्थ है जिसका जलीय विलयन

(i) स्वाद में खट्टा होता है तथा

(ii) जब अम्ल को धातु से अभिक्रिया कराया जाता  हाइड्रोजन गैस उत्सर्जित होता  है।

 

 लगभग सभी खनिज अम्ल धातु से अभिक्रिया कर हाइड्रोजन गैस मुक्त करते हैं। एसिड (अम्ल) शब्द की उत्पत्ति लैटिन शब्द ऐसिडस (acidus) से हुई है, जिसका अर्थ होता है-खट्टा। 

 

 

 भस्म वह पदार्थ है जिसका जलीय विलयन

1.स्वाद में कड़वा होता है

2. अम्ल को उदासीन कर लवण बनाता है।

 

 

 आरहेनियस के अनुसार  अम्ल एवं भस्म की परिभाषा

आरहेनियस के अनुसार   अम्ल वह पदार्थ है जिसे जल में घुलाने ( dissolve ) पर  हाइड्रोजन आयन (H+)देता है। जैसे-

 

 आरहेनियस के अनुसार   भस्म  वह पदार्थ है जिसे जल में घुलाने ( dissolve ) पर   हाइड्रोऑक्साइड  आयन (OH-)देता है। जैसे

 

https://en.wikipedia.org/wiki/Svante_Arrhenius
आरहेनियस

 

विधुत-अपघट्य  -(electrolyte) 

सभी अम्ल, भस्म तथा लवण के जलीय विलयन  विद्युत का संचालन करते हैं, जिन्हें हम विधुत-अपघट्य (electrolyte)  कहते हैं, जैसे हाइड्रोक्लोरिक अम्ल, सोडियम हाइडॉऑक्साइड सोडियम क्लोराइड आदि

  

विधुत -अन अपघट्य (nonelectrolyte)  –  

वैसे यौगिक जिनके जलीय विलयन  विद्युत का संचालन नहीं करते हैं, वे विधुत -अन अपघट्य (nonelectrolyte) कहलाते हैं यथा ऐल्कोहॉल, ग्लूकोस यूरिया  आदि

 जल में विलेय भस्म को क्षार कहते हैं। 

उदासीनीकरण-

जब अम्ल तथा भस्म ( क्षार ) को  अभिक्रिया कराया जाता है  तो लवण और जल बनता है ।

 जैसे

 

प्रबल अम्ल (strong acids) ;-

वे अम्ल जो जल में घुलकर लगभग पूर्णतः आयनित होकर हाइड्रोजन आयन (H+) प्रदान करते हैं, प्रबल अम्ल (strong acids) कहलाते हैं। उदाहरण के लिए, हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCI), नाइट्रिक अम्ल  और सल्फ्यूरिक अम्ल  प्रबल अम्ल हैं।

 

दुर्बल अम्ल (weak acids) : –

वे अम्ल जो जल में घुलकर सिर्फ आंशिक रूप में ही आयनित होते हैं, पूर्णतः नहीं, दुर्बल अम्ल (weak acids) कहलाते हैं। उदाहरण के लिए, कार्बोनिक अम्ल (H2Co3), ऐसीटिक अम्ल (CH3COOH), आदि दुर्बल अम्ल हैं

 

 बोरिक अम्ल (H3BO3) भी एक दुर्बल अम्ल है जिसका उपयोग ऐंटीसेप्टिक के रूप में किया जाता है। 

 

 

सांद्र अम्ल (concentrated acids) : – 

जब किसी  विलयन में अम्ल (ACID ) अधिक हो तो उस विलयन को सांद्र अम्ल (concentrated acids) कहा जाता है ।

 

तनु अम्ल (dilute acids): –

 जब किसी  विलयन में अम्ल (ACID ) की मात्रा  कम  हो तो उस विलयन को तनु अम्ल (dilute acids) कहा जाता है  

 

प्रबल भस्म या प्रबल क्षार (strong bases) :-

वे भस्म जो जलीय विलयन में लगभग पूर्णतः आयनित होकर काफी मात्रा में हाइड्रॉक्साइड आयन (OH ) प्रदान करते हैं, प्रबल भस्म या प्रबल क्षार (strong bases) कहलाते हैं।

 

दुर्बल भस्म या दुर्बल क्षार (weak bases) : –

वे भस्म जो जलीय विलयन में सिर्फ अंशतः आयनित होकर कम मात्रा में हाइड्रॉक्साइड आयन (OH) प्रदान करते हैं, दुर्बल भस्म या दुर्बल क्षार (weak bases) कहलाते

 

 

ऑल्फैक्टरी सूचक (olfactory indicator) : –

कुछ ऐसे पदार्थ होते हैं जिनकी गंध अम्लीय तथा क्षारीय माध्यम में भिन्न-भिन्न होती है इन्हें ऑल्फैक्टरी सूचक (olfactory indicator) कहते हैं, जैसे-प्याज, लवंग का तेल (clove oil) तथा वैनिला इत्र

 

 

यूनिवर्सल सूचक :-

किसी विलयन के pH का निर्धारण यूनिवर्सल सूचक द्वारा किया जाता है। विभिन्न pH के विलयन यूनिवर्सल सूचक म विभिन्न रंग परिवर्तन दर्शाते हैं

 

 

top 7 importance of pH in daily life दैनिक जीवन में pH का 7 उत्तम  महत्त्व- 

 

1.पाचन तंत्र में pH का महत्त्व-हमारे पेट में हाइड्रोक्लोरिक अम्ल बनते रहता है जो हमारे भोजन को पचाने में सहायक होता है। इसका pH 1.0 के लगभग कायम रहता है। इससे पेट को कोई नुकसान नहीं होता है, किंतु अपच (indigestion) के कारण जब पेट में अम्ल की मात्रा एक निश्चित सीमा से ऊपर हो जाती है तब पेट में गैस और जलन होने लगती है। अतः, बढ़े हुए अम्ल के प्रभाव को नष्ट करने के लिए हलके भस्म (mild base) का इस्तेमाल करना पड़ता है जिसे ऐंटासिड (antacid) कहते हैं। मिल्क ऑफ मैग्नीशिया (मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड) और सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट जैसे हलके भस्म प्रायः इस्तेमाल किए जाते हैं

      

2.pH परिवर्तन का दाँतों पर प्रभाव – जब हम शर्करायुक्त (sugary) भोजन करते हैं तब यह मुँह में मौजूद बैक्टीरिया द्वारा अपघटित होकर अम्ल बनाता है। जब मुँह का pH 5.5 से कम हो जाता है तब दाँत के दंतवल्क (enamel) क्षतिग्रस्त होने लगते हैं। हमारे मुँह का लार (saliva) हल्का क्षारीय होने के कारण कुछ अंश तक अम्ल को उदासीन बना देता है, लेकिन बाकी बच्चे अम्ल पर कोई प्रभाव नही पड़ता है इसे दूर करने के लिए नीम का दातुन या दंतमंजन की आवयश्कता होता है जो भास्मिक प्रकृति होने के कारण हमारे दांत की सफाई एवं रक्षा करता है

 

3.थकान के समय शरीर के माँसपेशियों में अम्ल की उत्पत्ति – शारीरिक परिश्रम करने से लैक्टिक अम्ल बनता है जो हमारे शरीर की मांसपेशियों में दर्द और कड़ापन ला देता है। इस

अवस्था में मांसपेशियों में ऑक्सीजन की आपूर्ति कम हो जाती है जिससे ऊर्जा का उत्सर्जन कठिन हो जाता है। फलतः वातनिरपेक्ष उपापचय (anaerobic metabolism) क्रिया का वेग बढ़ जाने से माँसपेशियों में लैक्टिक अम्ल एकत्र हो जाता है

 

4.अम्ल के प्रयोग से बरतनों के धब्बों को दूर करना – कॉपर के बरतनों पर भास्मिक कॉपर ऑक्साइड की परत जम जाने के कारण उनकी चमक बदरंग हो जाती है। चूंकि नींबू के रस में सिटिक अम्ल रहता है, अतः बरतन की सतह को नींब के एक टुकड़े से रगड़कर साफ कर देने से बरतन की चमक वापस लौट आती है। नींबू में उपस्थित सिट्रिक अम्ल भास्मिक कॉपर ऑक्साइड से अभिक्रिया करके कॉपर सिट्रेट बनाता है जो जल के साथ बाहर निकल जाता है

 

5.मिट्टी का pH -मिट्टी का pH 7 के आसपास रहने पर ही अधिकांश पौधों की वृद्धि संतोषजनक ढंग से होती है। मिट्टी के अत्यधिक अम्लीय या क्षारीय होने पर पौधों की वृद्धि बाधित हो जाती है। मिट्टी के अत्यधिक अम्लीय रहने पर उसमें कली चूना, भखरा चूना या कैल्सियम कार्बनिट डालकर उसका pH नियंत्रित किया जाता है।

 

6.pH और जलीय जीव – जल का pH एक निश्चित सीमा के अंदर रहने पर ही उसमें वास करनेवाली मछलियाँ तथा अन्य जीव सुरक्षित रहते हैं। अम्ल-वर्षा या अन्य कारणों से जब नदियों/ तालाबों का pH मान बहुत ही निम्न हो जाने से जल में रहने वाले जीवों की स्थिति दयनीय हो जाता है।

 

 

7.प्रकृति द्वारा उदासीनीकरण की व्यवस्था-नेटल कई स्थानिक नामों से जाने जाते हैं, यथा बिच्छुत्ती, उरकुस्सी आदि नेटल (nettle) एक झाड़ी में उगनेवाला पौधा होता है। इसके पत्तों में डॅसनेवाले रोएँ होते हैं जिसके अचानक छू जाने से चमड़े में खुजली होती है। यह खुजली रोएँ द्वारा मेथेनोइक अम्ल (फॉर्मिक अम्ल) के स्राव से होती है। इस खुजली के उपचार हेतु डॉक पौधों (dock plant) के पत्तों को खुजली वाले स्थान पर रगड़ा जाता है। डॉक पौधे नेटल पौधों के नजदीक ही उगते हैं।

 

 

 लवण  

 

जब अम्ल तथा भस्म ( क्षार ) को  अभिक्रिया कराया जाता है  तो लवण और जल बनता है । जैसे

 

 सामान्यतः, लवणों को निम्नांकित तीन वर्गों में बाँटा जाता है। 

 

  1. सामान्य लवण-

 

  1. अम्लीय लवण

 

  1. भास्मिक लवण-

 

 

 

1.सामान्य लवण-(Normal Salts)

 

वैसे लवण जिनमें विस्थापनशील हाइड्रोजन या हाइड्रॉक्सिल समूह नहीं होते हैं सामान्य लवण कहलाते हैं। जैसे-NaCl, KCl

 

2 अम्लीय लवण (Acidic salts):

 वे लवण जो किसी अम्ल के अणु में उपस्थित विस्थापनशील हाइड्रोजन परमाणु को धातु द्वारा अंशतः विस्थापित करने के फलस्वरूप बने लवण को अम्लीय लवण कहते हैं।

जैसे-

 

3.भास्मिक लवण (Basics Salts)

 

-वैसे भस्म जिनके अणु में एक से अधिक हाइड्रॉक्सिल समूह होते हैं; अम्लों द्वारा आंशिक रूप से उदासी होकर ये भास्मिक लवण प्रदान करते हैं।

जैसे- Pb(OH)Cl, Bi(OH)2NO3, CuCO3.  Cu(OH)2, 2РbCO3. Рb(OH)2,  Mg(OH)Cl आदि।

 

 

 

लवण के गुण लवण के pH

 

  1. प्रबल अम्ल तथा प्रबल भस्म से बने लवणों का जलीय विलयन उदासीन होता है तथा विलयन का pH मान 7 होता है। उदाहरणार्थ- KCl, NaCl, KNO3, Na,SO.

 

  1. प्रबल अम्ल तथा दुर्बल भस्म से बने लवणों का जलीय विलयन अम्लीय होता है। जैसे-NH.CI, FeCl, CuSOA, AICl, आदि के जलीय विलयन अम्लीय होतेहै

 

  1. दुर्बल अम्ल तथा प्रबल भस्म से बने लवणों का जलीय विलयन क्षारीय होता है तथा विलयन का pH मान 7 से अधिक होता है। Na,CO., NaHCO,, CH,COONa तथा NaCN के जलीय विलयन क्षारीय होते हैं।

 

 

 

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भारती भवन क्लास 10 प्रकाश का परावर्तन – bharti bhawan class 10 प्रकाश का परावर्तन

 

 

 

 

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सोडियम क्लोराइड (साधारण नमक, NaCl) :

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सोडियम हाइड्रॉक्साइड तथा हाइड्रोक्लोरिक अम्ल की अभिक्रिम से सोडियम क्लोराइड प्राप्त होता है।

NaOH + HCl → NaCl + H2O

भारत 95% सोडियम क्लोराइड (साधारण नमक) समुद्री जल के वाष्पीकरण द्वारा प्राप्त किया जाता है।

 

 

 

सेंधा एवं काला नमक (rock salt) :-

काला सेंधा नमक (rock salt) को जमीन खोदकर खदानों | (mines) से प्राप्त किया जाता है। इस नमक में अशुद्धि के रूप में लाल चिकनी मिट्टी के कण (marl) मिले होते हैं जिसके कारण नमक का रंग भूरा हो जाता है।

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आयोडीनयुक्त नमक (Iodised salt) :-

साधारण नमक में की थोड़ी मात्रा KIO3, या KI मिलाकर नमक आयोडीनयुक्त नमक बनाया जाता है।

 घेघा रोग (goitre) हमारे आहार (भोजन) में आयोडीन की कमी से होती है। 

 

 

सोडियम क्लोराइड (साधारण नमक, NaCl) के उपयोग :-

 

1. मानव आहार (भोजन) का आवश्यक अंग,

2. आचार के परिरक्षण में,

3. साबुन बनाने में

4. उद्योगों में इसका उपयोग

5. क्लोरीन

6. सोडियम काबनिट (Na 2Co3),

7. सोडियम बाइकार्बनिट (NaHCO3)

8. सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH) आदि बनाने

 

सोडियम हाइड्रॉक्साइड बनाने की विधि-

सोडियम हाइड्रॉक्साइड को क्लोर-ऐल्कली विधि द्वारा बनाया जाता है। इस विधि में सोडियम क्लोराइड के संतृप्त जलीय विलयन का विद्युत-अपघटन किया जाता है। सोडियम क्लोराइड के जलीय विलयन में Na+ तथा CI- आयन विद्यमान होते हैं। विद्यत-अपघटन से Cl-आयन ऑक्सीकृत होकर ऐनोड पर CI2, गैस देता है तथा Na’+ कैथोड पर Na धातु में परिणत हो जाता है। सोडियम धातु जल से अभिक्रिया कर NaOH बनाता है।

 

 

सोडियम हाइड्रॉक्साइड के उपयोग-

(i) सावुन तथा अपमार्जक(detergent) बनाने में

(ii) कागज बनाने में

(iii) प्रयोगशाला में अभिकर्मक (reagent) के रूप में

 

हाइड्रोजन गैस के उपयोग-

1. वनस्पति तेल का हाइड्रोजनीकरण कर उन्हें वनस्पति घी में परिणत करने में

2. हैबर विधि द्वारा अमोनिया बनाने में

 

क्लोरीन गैस के उपयोग–

(i) कपड़ों एवं कागज को विरंजित करने में

(ii) कीटो को नष्ट  करने   के कारण पेयजल को शुद्ध करने में –

(iii) विरंजक चूर्ण (bleaching powder) बनाने में

 

 

सोडियम बाइकार्बोनेट (NaHCO3,) या खाने का सोडा 

  सोडियम बाइकार्बोनेट (NaHCO3,) को खानेवाला सोडा भी कहते हैं। इसे प्रायः अमोनिया-सोडा विधि या साल्वे विधि द्वारा तैयार किया जाता है। 

 

अमोनिया-सोडा विधि या साल्वे विधि

सिद्धांत :- अमोनिया गैस से संतृप्त सोडियम क्लोराइड के संतृप्त जलीय विलयन (ब्राइन) में कार्बन डाइऑक्साइड गैस प्रवाहित करने के फलस्वरूप सोडियम बाइकार्बोनेट प्राप्त होता है।

 

NaCl (सोडियम क्लोराइड)  +  (जल) H2O  +  (कार्बन डाइऑक्साइड0  CO2 +  अमोनिया ( NH3) — NH4Cl (अमोनियम क्लोराइड)  + NaHCO3 (सोडियम बाइकार्बोनेट,)

 

 

 

सोडियम बाइकार्बोनेट गुण

1. सोडियम बाइकार्बोनेट NaHCO3 का जलीय विलयन क्षारीय होता है तथा इस विलयन का pH मान 7 से अधिक होता है

2. NaHCO3, अम्लों को उदासीन करता है तथा अभिक्रिया के फलस्वरूप Co2, गैस निकलती है।

3. NaHCO3, को गर्म करने पर यह Na2CO3, H2O तथा CO2 में अपघटित हो जाता है।

 

सोडियम बाइकार्बोनेट के उपयोग

1. बेकिंग पाउडर बनाने में

2. पावरोटी अथवा केक (cake) को मुलायम व स्पंजी (spongy) बनाने में

3. पेट की अम्लीयता को कम करने की औषधि (ऐंटासिड) के रूप में

4. सोडियम बाइकानिट का उपयोग अग्निशामक यंत्रों (fire extinguisher) में भी किया जाता है।

 अग्निशामक यंत्र में NaHCO3, तथा H2SO4 रहते हैं। 

4. रसोईघर में, खाने के सोडा का उपयोग खस्ता व्यंजन बनाने में कभी-कभी इसका इस्तेमाल खाना जल्द पकाने के लिए भी किया जाता है

 

 

धोने का सोडा (washing soda)  या सोडियम कार्बोनेट

  धोने का सोडा (washing soda)  या सोडियम कार्बोनेट सामान्यतह     अमोनिया-सोडा विधि या साल्वे विधि से तैयार किया जाता है। 

अमोनिया-सोडा विधि या साल्वे विधि

सिद्धांत- अमोनिया गैस से संतृप्त सोडियम क्लोराइड के संतृप्त जलीय विलयन (ब्राइन) में कार्बन डाइऑक्साइड गैस प्रवाहित करने पर सोडियम बाइकार्बोनेट प्राप्त होता है। |

NaCl (सोडियम क्लोराइड)  +  (जल) H2O  +  (कार्बन डाइऑक्साइड0  CO2 +  अमोनिया ( NH3) — NH4Cl (अमोनियम क्लोराइड)  + NaHCO3 (सोडियम बाइकार्बोनेट,)

 सोडियम बाइकार्बोनेट  NaHCO3 को गर्म करके सोडियम कार्बोनेट Na2CO3 प्राप्त किया जाता है। 

2 NaHCO3—- – Na2CO3 + CO2 + H2O

 

 सोडियम कार्बोनट के रवाकरण से धोने का सोडा | (Na2CO3·10H2O) प्राप्त होता है। 

 

 

धोने का सोडा (washing soda)  या सोडियम कार्बोनेट गुण-

1. Na2CO3, का जलीय विलयन क्षारीय होता है।

2. Na2CO3, अम्लों को उदासीन बनाता है तथा अभिक्रिया के फलस्वरूप Co, गैस निकलती है। | Na2CO3 + 2HCl → 2NaCl + CO2 + H2O

3. सोडियम कार्बोनेट (Na2CO3·10H2) को तीव्रता से गर्म करने पर अनार्द्र Na2CO3, बनता है।

Na2CO3·10H2→ Na2CO3+ 10H2O

सोडियम कार्बोनेट के विलयन में CO2 गैस प्रवाहित | करने पर सोडियम बाइकार्बनिट बनता है।
Na2CO3 + H2O + CO2 → 2NaHCO3

 

 

उत्फुल्लन (Efflorescence) —

Na2CO3·10H2O हवा में खुला छोड़ने पर रवाकरण के जल को त्याग सोडियम कार्बोनेट मोनोहाइड्रेट का चूर्ण बनना उत्फुल्लन कहलाता है।

 

 

धोने का सोडा के उपयोग-

1. कपड़ा आदि धोने में

2.प्रयोगशाला में अभिकर्मक के रूप

3.काँच, कागज, साबुन आदि के उत्पादन में

4.जल का स्थायी खारापन दूर करने में

 

 

विरंजक चूर्ण (bleaching powder) Ca(OCI)Cl

शुष्क बुझे हुए चूने [Ca(OH)2] को 40 °C तक तप्त कर उसके ऊपर क्लोरीन गैस प्रवाहित करने पर विरंजक चूर्ण (bleaching powder) प्राप्त होता है।

Ca(OH2 + Cl2 → Ca(OCI)Cl + H2O

विरंजक चूर्ण गुण-यह सफेद चूर्ण है जिससे क्लोरीन की गंध निकलती है।

 

 

1. कार्बन डाइऑक्साइड का प्रभाव-ब्लीचिंग पाउडर अत्यंत अस्थायी यौगिक है तथा वायुमंडल से CO2 एवं आर्द्रता ग्रहण कर क्लोरीन गैस देता है।
 

Ca(OCl)Cl + CO2 + CaCO3, + Cl2

2. जल का प्रभाव-विलयन में यह अपघटित होकर कैल्सियम क्लोराइड तथा कैल्सियम हाइपोक्लोराइट देता है।

3.अम्ल का प्रभाव- यह तनु HCI के साथ अभिाक्रया कर क्लोरीन देता है।

 

कैल्सियम ऑक्सी  क्लोराइड Ca(OCI)Cl +   हाइड्रो क्लोरिक अम्ल 2HCI  →  कैल्सियम  क्लोराइडCaCl2 +  जल H2O +  क्लोरीन  Cl2

 

 

विरंजक चूर्ण (bleaching powder) Ca(OCI)Cl  के उपयोग 

 

1. कीटाणुनाशक के रूप में
2. कागज एवं कपड़ों के विरंजन में
3. क्लोरीन, क्लोरोफॉर्म आदि बनाने में

 

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प्लास्टर ऑफ पेरिस (CasO4)2 H2O या CaSO4, 1/2 H2o

जिप्सम को 120 °C तक सावधानीपूर्वक गर्म करने के फलस्वरूप प्लास्टर ऑफ पेरिस (CasO4)2 H2O या CaSO4, 1/2 H2o बनता है।

2(Caso4 2H2O) → (Caso4),2H2O + 3H2O

प्लास्टर ऑफ पेरिस प्लास्टर ऑफ पेरिस में जल मिलाने के फलस्वरूप मिश्रण तप्त होकर जिप्सम (Caso42H2O) में परिणत हो जाता है। इस प्रक्रिया में यह जमकर ठोस बन जाता है।

(CasO4)2 H­2O + 3 H­2O —– 2Caso­4 2H2O

 

 

 

प्लास्टर ऑफ पेरिस (CasO4)2 H2O या CaSO4, 1/2 H2o उपयोग-

1. प्लास्टर ऑफ पेरिस का उपयोग मूर्ति बनाने किया जाता है।

2. इसका उपयोग शल्य चिकित्सा में टूटी हुई हड्डियों व बैठाने व जोड़ने में पट्टियों के रूप में किया जाता है।

 

 

जलयोजित लव (hydrated salt)

जिनमें रवाकरण के जल होते हैं वे जलयोजित लव (hydrated salt) कहलाते हैं

अनार्द्र लवण (anhydrous salt)

जिन लवणों में रवाकरण के जल नहीं होते अनार्द्र लवण (anhydrous salt) कहलाते हैं।

Cuso­45H20 →    Cuso­4, + 5H20
तूलिया या कॉपर सल्फेट →  अनार्द्र कॉपर सल्फेट (नीला)
 
Na2CO310H20 → Na2CO3, + 10H2O
धोने का सोडा  →अनार्द्र सोडियम कार्बोनट
 
2Caso42H2O → (Caso4),2H2O + 3H2O

 

 

प्रस्वेध लवण(Deliquescent salt) : –

कुछ लवणों में जल के लिए अत्यधिक प्रीति होता है इन लवणों को कुछ देर खुली हवा में छोरने पर ये वायु के जलवाष्प को अवशोषित कर पसीजने लगता है ऐसे लवण को प्रस्वेध लवण कहते है Mgcl2 Cacl2

 

 

उत्फुल्लन (Efflorescence) —

Na2CO3·10H2O हवा में खुला छोड़ने पर रवाकरण के जल को त्याग सोडियम कार्बोनेट मोनोहाइड्रेट का चूर्ण बनना उत्फुल्लन कहलाता है।

 

 

8 महत्वपूर्ण रासायनिक  यौगिक एवं  उसके  रासायनिक सूत्र  (  8 Best  Chemical compound and thier chemical formula  –)

रासायनिक यौगिकों की सूची- उनके और उनके रासायनिक सूत्र List of Chemical compounds- their and thier chemical formula 

 

यौगिक का नाम  यौगिक रासायनिक सूत्र
( बेकिंग सोडा ) खाने का सोडा NaHco3
धोने का सोडा Na2Co310पानी /  Na2Co310H20
जिप्सम – Caso4 2पानी
प्लास्टर ऑफ़ पेरिस Caso4 1/2 पानी
विरंजक चूर्ण Caocl2
बुझा चुना Ca(OH)2
संगमरमर Caco3
कास्टिक सोडा NAOH

 

 

 

विभिन्न पदार्थों में पाया जाने वाला अम्ल (Acid found in different substances)

फलों और सब्जियों में मौजूद अम्लों के नामों की सूची  (List names of acids present in fruits and vegetables )

पदार्थ उपस्थित अम्ल
सेब मैलिक अम्ल
इमली टार्टरिक अम्ल
संतरा व नींबू खट्टा फल साइट्रिक अम्ल
सिरका ऐसीटिक अम्ल
दुध दही लैक्टिक अम्ल
टमाटर ऑक्जैलिक अम्ल
आमाशय-रस हाइड्रोक्लोरिक अम्ल
चाय टैनिक अम्ल
लाल चींटी फॉर्मिक अम्ल
विटामिन C ऐस्कॉर्बिक अम्ल
शुक्र ग्रह सल्फ्यूरिक अम्ल

 

 

 

विभिन्न पदार्थों के pH मान की सूची -(List of pH value of different substances )

विभिन्न पदार्थों के pH मान की सूची List of pH value of different substances

विलयन PH मान
अमाशय –रस 1.0
नींबू 2.4
सिरका 3.0
टमाटर 4.1
पसीना 4.5
अम्ल वर्षा 5.6
पेशाब 6.0
दुध 6.4
आंसू 7.4
खून 7.4
अम्ल पित 7.5 – 8.5
चुना जल 11.0

 
class 10th bharti bhawan अम्ल भस्म लवण  का पार्ट -1 देखने के लिए यहा क्लिक करे-

 

 

ACID BASE SALT YOUTUVE PPT

 

 

 

 

 

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