Bharti Bhawan Physics Class 10 Chapter 4 important notes

Bharti Bhawan Physics Class 10 Chapter 4 important notes

Bharti Bhawan Physics Class 10 | Bharti Bhawan Physics Class 10 physics chapter-4 electric current |

Bharti Bhawan Physics Class 10 विधुत धारा का नोट 

कुछ पदार्थो मे विधयुत आवेश आसानी से पास हो जाते है किन्तु कुछ पदार्थो मे ऐसा नही होता  है । इसलिए सभी पदार्थो को विधयुत (electrical categories ) की दृष्टिकोण से दो भागो मे बांटा गईं है –

        चालक पदार्थ (conductor )

       कुचालक पदार्थ  ( insulators )

  1. सुचालक पदार्थ – वैसे पदार्थ जिनसे होकर इलैक्ट्रिक चार्ज आसानी से पास हो जाए , सुचालक कहलाता है । किन्तु इलैक्ट्रिक चार्ज के प्रवाह को Electricity कहते है । तो हम कह सकते है की वैसे पदार्थ जिनसे होकर electricity आसानी से प्रवाह हो जाए सुचालक पदार्थ कहलाता है ।

जैसे –  सभी धातुए  जैसे – silver , copper , and aluminium etc.

       मिश्रधातुए जैसे – nichrome , manganin and constantan ( इसका ऊष्मीय धातुए का उपयोग विधयुत यंत्र के रूप मे करते है ।

        Graphite जो की कार्बन का एक अपरूप है , यह भी सुचालक ही है ।

        मानव शरीर भी एक अच्छी सुचालक का उदाहरण है ।

  1. कुचालक पदार्थ ( insulator ) :-

वैसे पदार्थ जिनसे होकर electric charge पास नही हो , उसे हम कुचालक कहेंगे ।

        दूसरे शब्दो मे – वह सभी पदार्थ जिनसे होकर electricity पास न हो , उसे हम कुचालक कहते है ।

        जैसे – glass ( ग्लास ) , ebonite , rubber , प्लास्टिक , पेपर , सुखी लकड़ियाँ , cotton , mica ( अभ्रक ) , Bakelite , porcelain , हवा ये सभी कुचालक है , क्योंकि इनसे होकर विद्धुत पास नही होती है ।

ये सभी पदार्थ electric charge को आगे नही बढने देते है ।

                अभी हमने देखा की कुछ पदार्थ सुचालक होते है तथा कुछ पदार्थ कुचालक । अब हम इनके behavior  के बारे मे बात करेंगे ।

  • सभी सुचालक पदार्थ जैसे धातुए , के पास कुछ electron होते है जो आसानी से त्याग कर देते है जिसे हम free electron कहते है । और यह free electron आसानी से एक परमाणु से दूसरे परमाणु तक चला जाता है ।
  • Free electrons के कारण ही ये सभी पदार्थ सुचालक बन जाता है ।
  • कुचालक पदार्थ मे electron बहुत ही मजबूती के साथ से जुड़े रहते है । इसलिए इन सभी पदार्थ मे एक भी free electron नही होते है और एक परमाणु से दूसरे परमाणु से नही जा पाता है । इसलिए कुचालक पदार्थ से electricity प्रवाह नही होता है ।

Electricity को दो भागो मे बांटा गया है –

  1. Static electricity
  2. Current electricity     

 

  1. Static electricity :-

इस प्रकार के electricity मे electric charge स्थिर रहते है और वे एक जगह से दूसरे जगह नही जा सकते है ।

        जैसे – काँच की छड़ को रेशम  कपड़ा से रगने पर जो चार्ज रहता है , और एबोनाइट की छड़ को ऊनी कपड़े से रगड़ने पर जो चार्ज आता है वह सभी static electricity का उदाहरण है ।

        वरसत के मौसम मे जो बिजली चमकता है यह भी static electricity का ही उदाहरण है ।

  1. Current electricity :-

        इस प्रकार के electricity मे electric charge गति ( motion ) मे होते है ।

        हमारे घरो मे उपयोग होने वाले बिजली , current electricity का उदाहरण है।

 

 Electric potential (विधयुत विभव )

 जब एक धन आवेश को एक विधयुत क्षेत्र मे रखा जाता है किसी दूसरे आवेश के कारण तो एक बल की जरूरत होती है । अतः उस धन आवेश को  लाने के लिए जो कार्य किया जाता है उसे ही विद्धुत विभव कहा जाता है ।

        अतः हम कह सकते है की किसी बिन्दु पर विद्धुत विभव कार्य का वह परिमाण होता है जो प्रति एकांक आवेश को अनंत से उस बिन्दु तक लाने मे किया जाता है।

  • अनंत पर विद्धुत विभव का मान शून्य होता है ।
  • विभव को v से सूचित किया जाता है ।
  • विभव का I UNIT वोल्ट (volt) कहा जाता है

किसी बिन्दु पर 1 वोल्ट  का मतलब एक धन आवेश को अनंत से एक निश्चित बिन्दु तक लाने मे 1 जूल का कार्य सम्पन्न हो ।

  • चूंकि चार्ज अर्थात आवेश का इकाई कूलम्ब ( coulomb ) होता है । अतः हम कह सकते है की यदि 1 कुलम्ब धन को अनंत से किसी बिन्दु तक लाने मे 1 जुल कार्य सम्पन्न हो , उस बिन्दु पर विद्धुत विभव 1 वोल्ट कहलाता है ।

Note :- विद्धुत विभव के मात्रक का नाम वोल्ट (volt) इटली के वैज्ञानिक आलेसांद्रो वोल्टा ( alessandro Volta

) के सम्मान मे रखा गया ।

आवेशित वस्तुओ का विभव

       यदि एक धन आवेश +q को एक अनावेशित वस्तु की ओर लाते है तो हमे कोई कार्य नही करना पड़ेगा । अतः विधयुत विभव के परिभाषा के अनुसार अनावेशित वस्तु का विभव शून्य होता है । परंतु , उसी धन आवेश +q को जब हम एक धनावेशित वस्तु की ओर लाते है तो हमे प्रतिकर्षण बल के वीरुध कुछ कार्य करना परता है । अतः  एक धन आवेशित वस्तु का विभव धनात्मक होता है । उसी प्रकार , एक ऋणावेशित वस्तु का विभव ऋणात्मक होता है ।

विभावांतर

       यदि एक आवेश  +q को बिन्दु B  से बिन्दु A तक लाने मे किया गया  कार्य WAB हो , तो  A और B बिन्दुओ के बीच का विभावांतर ,

       VAB = VA – VB =

 अतः , किन्ही दो बिन्दुओ के बीच विभावानतार की माप उस कार्य से होती है जो प्रति एकांक ( एकांक ) आवेश को एक बिन्दु से दूसरी बिन्दु तक ले जाने मे किया जाता है ।

              यदि दो बिन्दुओ A और B के बीच विभावनतर VAB को , V तथा बिन्दु B से बिन्दु A तक आवेश q को ले जाने मे किए गए कार्य WAB को W लिखा जाए तो

             

  • विभावनतर का SI unit वोल्ट ही होता है ।
  • यदि 1 कुलम्ब धन आवेश को एक बिन्दु से दूसरे बिन्दु तक ले जाने मे 1 जूल कार्य करना परे तो इन दोनों बिन्दुओ के बीच विभावांतर 1 वोल्ट कहलाता है ।

     आज के इस post मे हमने जाना की विधयुत वैभव तथा विभओ का अंतर क्या होता है । साथ ही यह भी जाना की चालक तथा कुचालक क्या होता है । कोई भी पदार्थ क्यों अच्छी चालक होती है तथा क्यों कुचालक होती है । static electricity और current electricity क्या होती है , क्या अंतर होती है यह भी जाना ।

                        अब इससे आगे हम अगले पोस्ट मे विस्तार से देखेंगे की current electricity क्या होती है ।

 

 

भारती भवन क्लास 10 प्रकाश का परावर्तन – bharti bhawan class 10 प्रकाश का परावर्तन

 

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