रासायनिक अभिक्रिया

रासायनिक अभिक्रिया
जब कोई पदार्थ अकेले ही या किसी अन्य पदार्थ से क्रिया करके भिन्न गुण वाले एक या अधिक नए पदार्थों का निर्माण करता है, तब वह प्रक्रिया रासायनिक अभिक्रिया कहलाती है।

रासायनिक समीकरण(Chemical Equations)
किसी रासायनिक अभिक्रिया में भाग लेनेवाले पदार्थों के संकेतों एवं सूत्रों की सहायता से उस अभिक्रिया का संक्षिप्त निरूपण रासायनिक समीकरण कहलाता है।)

 

 जो पदार्थ रासायनिक अभिक्रिया में भाग लेकर नए पदार्थ बनाते हैं उन्हें अभिकारक (reactant) कहते हैं और रासायनिक अभिक्रिया के फलस्वरूप बने नए पदार्थ प्रतिफल (product) 

रासायनिक अभिक्रियाओं की विशेषताएँ

1.गैस की उत्पत्ति

2. अवक्षेप का बनना

3.रंग-परिवर्तन :-

4.ताप में परिवर्तन

5.अवस्था में परिवर्तन:-

रासायनिक समीकरण लिखने के नियम

1. रासायनिक अभिक्रिया ( chemical reaction ) के अभिकारकों को उनके संकेतों या सूत्र के पदों में समीकरण के बायीं ( left ) ओर लिखा जाता है।

2. अभिकारकों के सत्रों के बीच धन-चिह्न (+) दिया जाता है।।

3. समीकरण के दायीं ओर अभिक्रिया के प्रतिफलों को उनके संकेतों या अणुसूत्रों के पदों के रूप में लिखा जाता है।

4. प्रतिफलों के सूत्रों के मध्य धन-चिह्न (+) दिया जाता है।

5. अभिकारकों और प्रतिफलों को एक तीर-चिह्न (→) द्वारा
अलग-अलग प्रदर्शित किया जाता है। तीर-चिह्न यह दिखाता है कि अभिक्रिया किस दिशा की तरफ हो रही है।
A + B → C + D

इस रासायनिक समीकरणों में A और B अभिकारक (reactants) हैं, जबकि C और D प्रतिफल (products) है। तीर-चिह्न यह बताता है कि A और B की अभिक्रिया के फलस्वरूप C और D बन रहे हैं।

संतुलित रासायनिक समीकरण (Balanced chemical equation) :- संतुलित रासायनिक समीकरण वह है जिसमें समीकरण के बांयी और दांयी ओर के प्रत्येक तत्त्व के परमाणुओं की संख्या बराबर अर्थात सामान होती है।

असंतलित रासायनिक समीकरण (Unbalanced chemical equation):- असंतुलित रासायनिक समीकरण वह है जिसमें समीकरण के दोनों ओर तत्त्वों के परमाणुओं की संख्याएँ समान नहीं होती है।

 

किसी भीं रासायनिक समीकरण की मदद से हमें अनेक प्रकार की सूचनाएँ प्राप्त होती हैं , जिनमे से कुछ मुख्या जानकारी निम्नलिखित है –

1. यह अभिकारकों एवं प्रतिफलों के संकेत/सूत्र की जानकारी देता है।

2. अभिक्रिया में भाग लेने वाले पदार्थ और अभिक्रिया के परिणामस्वरूप कौन-कौन-से पदार्थों का निर्माण होता है, इस बात की भी जानकारी मिलती है

3. यह अभिक्रिया में भाग लेनेवाले अभिकारको के परमाणुओं एवं अणुओं की आपेक्षिक संख्याओं की जानकारी देता है।

4. यह अभिक्रिया के फलस्वरूप निर्मित प्रतिफलों के परमाणुओं एवं अणुओं की आपेक्षिक संख्याओं की जानकारी देता है।

5. यह अभिकारकों और प्रतिफलों के मोलों के अनुपात की जानकारी देता है।

6. यह अभिकारकों और प्रतिफलों के द्रव्यमानों का अनुपात बताता है।

7. यह गैसीय अभिकारकों और प्रतिफलो के आपेक्षिक
आयतन की जानकारी देता है।

 

रासायनिक समीकरण के उपयोग से लाभ

1. रासायनिक अभिक्रियों का समीकरणों में लिखना आसान होता है जिससे समय  कम लगता है और पेपर पर कम जगह की जरुरत होता है

2. रासायनिक समीकरण (Chemical Equation ) की मदद से अभिक्रिया में बने उत्पाद और अभिकारक के द्रव्यमानों का पता लगाया जा सकता है

3. एक ही प्रकार रासायनिक संकेत के प्रयोग से भविष्य में खोज में आसानी होता है

 

रासायनिक समीकरण को अधिक उपयोगी बनाना

रासायनिक समीकरणों की कुछ विसंगति भी होता है उसी विसंगति को को दूर करने के लिए समीकरण को और अधिक उपयोगी बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

1. अभिकारकों एवं प्रतिफलों की भौतिक अवस्था की जानकारी : -अभिकारकों और प्रतिफलों की भौतिक अवस्था की जानकारी उनके संकेतों/सूत्रों के ठीक आगे कोष्ठक में ठोस के लिए ”, द्रव के लिए 1 एवं गैस के लिए ‘g’ लिखकर किया जाता है। इसी प्रकार, पदार्थ के जलीय विलयन के लिए ‘aq’ अंकित । किया जाता है। यथा,
CaCO3(s) → CaO(s) + CO2(g)
Zn(s) + H2SO4(aq) → ZnSO4 (aq) + H2(g)

2.ऊष्मा क्षेपी एवं ऊष्माशोषी अभिक्रियाओं की जानकारी रासायनिक अभिक्रिया के फलस्वरूप उत्सर्जित या अवशोषित ऊष्मा की जानकारी ऊष्मा-रासायनिक समीकरण के द्वारा दी जाती है। ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया के लिए समीकरण के दायीं ओर + ऊष्मा तथा ऊष्माशोषी अभिक्रिया के लिए समीकरण के बायीं ओर + ऊष्मा लिख दिया जाता है। यथा,
C+ 02 → CO2 + ऊष्मा (ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया)
N2, + 02, + ऊष्मा → 2NO (ऊष्माशोषी अभिक्रिया)

3. गैस के उत्सर्जन की जानकारी :-यदि अभिक्रिया के लस्वरूप कोई गैस निकलती है तो समीकरण में गैस के सूत्र के क बाद चिह्न ↑ दिया जाता है; यथा,
Zn + H2SO4 → ZnSO4 + H2 ↑

4.अवक्षेप बनने की जानकारी :-यदि अभिक्रिया के फलस्वरूप
प्रतिफल अवक्षेप के रूप में पृथक होता है तो उस प्रतिफल संकेत/सूत्र के बाद .’ दिया जाता है; यथा,
AgNO3 + HCl → AgCl↓ + HNO3

5. अभिक्रिया की शर्तों की जानकारी -इसकी जानकारी के लिए समीकरण में प्रयुक्त तीर-चिह्न (→) के ऊपर या नीचे दाब, ताप सांद्रण, उत्प्रेरक आदि शतों क निर्देशन किया जाता है, यथा

अभिकारकताप\दाब प्रतिफल

6. अभिक्रिया की उत्क्रमणीयता की जानकारी:- रासायकि अभिक्रिया की उत्क्रमणीयता (reversibility) दर्शाने के लिए अभिकारक और प्रतिफल के बीच विपरीत दिशाओं में निर्देशित दो तीर-चिह्न दिए जाते हैं, यथा,
N2 + 3H2 ⇋ 2NH3

संयोजन या संश्लेषण अभिक्रियाएँ
संयोजन या संश्लेषण अभिक्रिया (combination or synthesis | reaction) वह है जिसमें दो या अधिक पदार्थ (तत्त्व या यौगिक) परस्पर संयोग करके एक नए पदार्थ का निर्माण करते हैं। नए पदार्थ के गुण मूल पदार्थ के गुण से बिलकुल भिन्न होते हैं।

वियोजन या अपघटन अभिक्रियाएँ (वियोजन या अपघटन अभिक्रिया (decomposition reaction):-

वियोजन या अपघटन अभिक्रियाएँ वह अभिक्रिया होती है, जिसमें किसी यौगिक के वडे अणु के टूटने से दो या अधिक सरल यौगिक बनते हैं जिनके गण मूल यौगिक के गुण से बिलकुल भिन्न होते हैं।

 एकल विस्थापन अभिक्रियाएँ –
एकल विस्थापन अभिक्रियाएँ वह अभिक्रिया होती है , जिसमें किसी यौगिक में उपस्थित किसी परमाणु या परमाणुओं के समूह को किसी दूसरे परमाणु द्वारा विस्थापित कर दिया जाता है, एकल विस्थापन अभिक्रिया single displacement reaction) कहलाती है।

ऑक्सीकरण एवं अवकरण अभिक्रियाएँ (oxidation reduction reactions) एक विशेष प्रकार की रासायनिक अभिक्रियाएँ हैं जो सदैव साथ-साथ होती हैं। ये रेडॉक्स अभिक्रियाएँ (redox reactions)  भी कहलाती है। रसायनशास्त्र के अध्ययन में इन दोनों प्रकार की अभिक्रियाओं का ज्ञान आवश्यक है।

ऑक्सीकरण

ऑक्सीकरण वैसी रासायनिक अभिक्रिया है जिसमें किसी तत्त्व या यौगिक से ऑक्सीजन का संयोग या किसी यौगिक से हाइड्रोजन का निष्कासन होता है।

अवकरण 

अभिक्रियाएँ ऑक्सीकरण के ठीक उलटी होती है।। अवकरण वैसी रासायनिक अभिक्रिया है जिसमें किसी तत्त्व या । योगिक के साथ हाइड्रोजन का संयोग या किसी यौगिक से। ऑक्सीजन का निष्कासन होता है।

 

 

दहन

किसी पदार्थ के ऑक्सीजन में जलने पर ऊष्मा और प्रकाश उत्पन्न होते है। जलने की इस क्रिया को दहन कहते है। उदाहरण-(i) कार्बन को वायु में जलाने पर कार्बन डाइऑक्साइड बनता है। इसमें ऊष्मा और प्रकाश भी उत्पन्न होते हैं।

C+02 →CO2 + ऊष्मा + प्रकाश

(ii) वायु में गंधक (S) को जलाने पर सल्फर डाइऑक्साइड बनता है तथा ऊष्मा और प्रकाश भी उत्पन्न होते हैं।

S+O2→SO2 + ऊष्मा + प्रकाश

 दहन में जो पदार्थ जलता है, उसे दहनशील या ज्वलनशील (combustible) कहते हैं। 

 

दहन(combustion) के लिए तीन बातो का होना जरुरी है

 

  1. दहनशील पदार्थ की उपस्थिति
  2. दहन के पोषक पदार्थ की उपस्थिति
  3. ज्वलन-ताप की प्राप्ति

 

 

 

 

द्रवीभूत पेट्रोलियम गैस (Liquefied Petroleum Gas or LPG)

पेट्रोलियम गैस ब्यूटेन (C4HO10), प्रोपेन (C3H8) और (C2H6) का मिश्रण है। लेकिन इसका मुख्य अवयव ब ब्यूटेन, प्रोपेन और एथेन तीव्रता से जलकर पर्याप्त ऊष करते हैं। इसीलिए पेट्रोलियम गैस एक उत्तम ईंधन है। दा पर ये तीनों गैसें आसानी से द्रवीभूत हो जाती हैं। इस द्रवीभूत पेट्रोलियम गैस (Liquefied Petroleum Gal कहते हैं। यह खाना बनाने के उपयोग में आनेवाली साम् है। LPG के जलने पर निम्नलिखित अभिक्रिया होती ।

2C4HO10 +13O2, →8CO2, +10H2O + ऊष्म

 

 

 

 

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